नवदुर्गा

 ** गीतिका **

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सभी जगहों पर खूब सजा है, मैया का दरबार। 

नवरात्रि का पर्व है पावन, भक्त करें जयकार। 


प्रथम शैलपुत्री माता हैं, पिता धन्य हिमवान। 

वृषभरूढ़ा अर्धचन्द्र धरा, सुन्दर रूप अपार। 


द्वितीय ब्रह्मचारिणी मैया, कमंडल माल के लिए। 

तप में रहता है लीन सदैव, भक्ति करे संसार। 


सुख समृद्धि क्षमता क्षमता, स्थितियां ऐश्वर्य हैं।

तृतीय चंद्रघंटा शक्ति है, जग में अपरंपार। 


चतुर्थ कूष्माण्डा देवी ने, रचित ब्रह्माण्ड। 

अष्टभुजा देवी है जग में, सबका पालनहार।  


स्कंदमाता ममतामयी हैं, मां का पंचम रूप।

इन पूजने से, सदा विजय उपहार।  


षष्ठ रूप मातु कात्यायनी, देवता अभय शोभायमान। 

सप्तम कालरात्रि दित हर, बाधा का संहार। 


अष्टम रूप महागौरी का, श्वेत धवल अति दिव्य। 

दुर्गा नवम सिद्धिदात्री है, सुख वैभव भंडार। 


भजे जो नवरात्री में, पाए सब ऐश्वर्य। 

नवदुर्गा की कृपा असीमित, करती भव से पार। 

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-सुरेंद्रपाल वैद्य।


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